हिंदू जाति ' का सैन्यीकरण करना और उसका एक राष्ट्र-राज्य गठन करना था.
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‘स्वदेशी ' का तमाम दावों के बावजूद यह नितांत ‘विदेशी' विचारधारा थी जिसका लक्ष्य ‘जुडियो-क्रिश्चियन पंथों' के अनुरूप हिंदू धर्म का पुनर्गठन करना, ‘हिंदू जाति' का सैन्यीकरण करना और उसका एक राष्ट्र-राज्य गठन करना था.